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Diversity: India’s big hope against right-wing resurgence

Mudrarakshasa Liberal gloom appears to be insurmountable. There appears to be no effective or meditated response to right-wing...

A Secular Spade

Vishakh Rathi* Rise of the right-wing has stimulated a new churn amongst the liberals in India. Some have...

सरहद के उस ओर

ओंकार केडिया* मैं सरहद के इस ओर से देखता हूँ उस ओर की हरियाली,

कैक्टस हँस रहे हैं – दो कविताएं

मनोज पांडे* कैक्टस हँस रहे हैं – एक वर्षों से बरबस बरसती गर्म रेत,टीला...

राम जन जन में – राम मन मन में

पूनम जैन* राम तो बसते हैं हर कण में, हर मन मेंवो हो श्रमिक,...

मरुभूमि की कविताएं – अजंता देव* की कविता शृंखला

आश्चर्य होता है कि कविता अपना रस, अपना पोषण कहाँ-कहाँ से ढूँढ निकालती है। कवि की नज़र अनछुई, अनजानी जगहों में...

प्रेमचंद की प्रासंगिकता

प्रेमचंद की जयंती पर राजेन्द्र भट्ट* की श्रद्धांजलि प्रेमचंद की प्रासंगिकता स्वत:सिद्ध है लेकिन फिर भी इस विषय...

महाराज की हो जय! प्रजा सुखी ही है

नरेश जोशी*   किस्से कहानी सुनते आए थे, महाराज अचानक सोते उठते, कभी तो नाक पर मक्खी को...

मनचाही मृत्यु

ओंकार केडिया* उन्होंने कहा, मरने के लिए तैयार रहो, सारा इंतज़ाम है...