LATEST ARTICLES

अमलतास, गुलमोहर और गुलज़ार 

ओंकार केडिया* ओंकार केडिया की कविताओं से आप पहले ही परिचित हैं। इस वेब पत्रिका में प्रकाशित उनकी अनेक...

अनसुलझा समीकरण

डॉ मधु कपूर* पिछले कुछ समय से दार्शनिक सिद्धांतों को हमारी वेबपत्रिका के लिए सहज-सुगम शैली में प्रस्तुत कर...

मैं शब्दों का जादूगर हूँ

सुधीरेंद्र शर्मा* “जो जाने-माने कवि और गीतकार आनंद बक्शी को नहीं जानता वो हिंदी सिनेजगत से वाकिफ नहीं है”,...

स्त्री-चेतना की खिड़कियाँ

ओम निश्चल* पारुल बंसल की कविताएं इस वेबपत्रिका में प्रकाशित होती रही हैं और इस पत्रिका के...

DOES SOCIAL MEDIA INFLUENCE VOTING BEHAVIOUR?

Manoj Pandey* I am neither a psephologist nor a political analyst. I am a media/ social media watcher...

शाम आती है, आती रहेगी

सुधीरेन्द्र शर्मा* क्या यह कहना सही होगा कि हम कुछ खास दिनों को तो 'सेलिब्रेट' करते हैं (जैसे आज...

जागें जथा सपन भ्रम जाई

डॉ मधु कपूर* पिछले कुछ समय से इस वेब-पत्रिका में हम विभिन्न दार्शनिक सिद्धांतों पर डॉ मधु कपूर के...

चाकू: हथियार या विचार – सलमान रुश्दी की नई किताब पर...

सुधीरेन्द्र शर्मा* 35 वर्ष पूर्व ईरान के धार्मिक और राजनीतिक नेता अयातुल्लाह ख़ुमैनी ने भारत में जन्मे ब्रिटिश...

द्विमुखी सत्य की संकल्पना

डॉ मधु कपूर* आजकल पूरे विश्व में ‘उत्तर-सत्य काल’ या ‘Post-truth Era’ का बोलबाला है। ऐसे में...