ब्लॉगिंग के हैं कई फ़ायदे – आपने ब्लॉग बनाया क्या?

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अमिताभ बच्चन का ब्लॉग कोई दिन नहीं जाता बिना ब्लॉगिंग के!

मनोज पांडे* 

इस पोस्ट में मैं आपस में जुड़ी तीन बातों पर चर्चा करूंगा: ब्लॉगिंग है क्या, इसके क्या फायदे हैं और सरल तरीके से ब्लॉग बनाया कैसे जाए.

 तो चलिए शुरू करते हैं चर्चा इस बात पर कि ब्लॉगिंग है क्या.

ब्लॉगिंग शब्द का जन्म हुआ अंग्रेजी में वेब  तथा लॉगिंग  शब्दों के मेल और फिर उसके टुकड़े करने के बाद. शुरू में ब्लॉगिंग का मतलब था इंटरनेट के जाल (world wide web) में एक डायरी बनाना, याने एक वेबसाइट बनाकर उसमें नए लेख लिखते रहना. 

आपने सुना होगा कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी का अपना एक पर्सनल ब्लॉग था. अभी के बड़े नेताओं में वित्त मंत्री अरुण जेटली अपनी पर्सनल वेबसाइट पर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर ब्लॉगिंग करते रहते हैं. अमिताभ बच्चन अपने ब्लॉग पर हर दिन एक नई पोस्ट लिखते हैं, बिना नागा किए हुए. विश्व की कई जानी-मानी हस्तियाँ ब्लॉग लिखती देखी जाती हैं. 

अब ब्लॉगिंग को इसके बहुत व्यापक अर्थ में लिया जाता है: जब आप किसी वेबसाइट या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में कोई लेख लिखते हैं तो मोटे तौर पर इसे ब्लॉगिंग कह दिया जाता है. कुछ ब्लॉगर्स के अपने ब्लॉग होते हैं और कई ब्लॉगर फेसबुक, लिंकडइन, इंस्टाग्राम जैसी वेबसाइटों पर लेख लिखते हैं, फोटो फीचर डालते हैं या वीडियो पब्लिश करते हैं. इस तरह की रचनात्मक गतिविधियाँ आज ब्लॉगिंग की परिभाषा में आ जाती हैं.

ब्लॉगिंग के कई फायदे हैं. यह पाया गया है ब्लॉगिंग हर उम्र के लोगों के काम आ सकती है चाहे उनका इरादा अर्थपूर्ण तरीके से समय बिताना हो या फिर ब्लॉगिंग से पैसे कमाने हों. एक नज़र डालते हैं कि किस तरह लोगों के काम आ रही है ब्लॉगिंग:

1. विश्व भर में हजारों प्रगतिशील स्कूल-कॉलेजों में ब्लॉगिंग का उपयोग फॉर्मल शिक्षा को अधिक सुरुचिपूर्ण बनाने और छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के माध्यम के रूप में हो रहा है. इसे एडु-ब्लॉगिंग कहा जाता है.

2. कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें ब्लॉगिंग धनार्जन का माध्यम बन गई है, जैसे कि पर्यटन, तकनीकी, खान-पान, स्वास्थ्य. इन क्षेत्रों में सफल हो चुके कई ब्लॉगर्स का कहना है कि ब्लॉगिंग से उन्हें संतोष भी मिलता है, काम करने में स्वायत्तता भी रहती है और आमदनी भी अच्छी हो जाती है.

३. कई छात्र-छात्राएं तथा अन्य ब्लॉगर ब्लॉगिंग के माध्यम से जेब-खर्च चला लेते हैं, और कई तो अच्छा धनोपार्जन कर लेते हैं. 

4. ब्लॉगिंग पेशेवर लोगों के लिए बहुत काम की चीज है. इससे उन्हें अपने विषय पर ज्ञान और कौशल को लोगों के सामने प्रस्तुत करने में मदद मिलती है.

5. रोज़गार  के क्षेत्र में प्रतिष्ठित कुछ कंपनियों ने उजागर किया है कि वो लोग भावी कर्मचारियों के व्यावसायिक तथा व्यक्तिगत गुणों को पहचानने के लिए ब्लॉग को बहुत महत्त्व देते हैं.

6. यह पाया गया है कि अगर बहुत छोटे बच्चों को ब्लॉगिंग की आदत डाल दी जाए तो उनकी लेखन क्षमता और सोचने की क्षमता काफी अच्छी हो जाती हैं. साथ ही, ऐसे बच्चे सोशल नेटवर्किंग साइटों पर अपना समय भी कम व्यर्थ करते हैं और उनका ध्यान नुकसान करने वाली वेबसाइटों पर कम जाता है.

7. कई लोगों का कहना है कि ब्लॉगिंग उन्हें फालतू में समय बर्बाद करने से रोकती है. कुछ ब्लॉगर साथियों ने ब्लॉगिंग के अनुशासन को लम्बे समय तक बनाये रख कर सैकड़ों रचनाओं की धरोहर बना ली है जो वह अन्यथा नहीं कर पाते.

8. बड़ी उम्र में ब्लॉगिंग के अपने फ़ायदे हैं. इससे दिमाग सक्रिय रखने के साथ-साथ अवसाद और बेचारगी के विचारों से बचा जा सकता है. बड़ी बीमारियों के बाद वापस सक्रिय होने में भी ब्लॉगिंग सहायक होती देखी गई है.

9. दुनिया की कई अग्रणी कंपनियां अपने ब्लॉग का बहुत ध्यान रखती हैं, और उसे अपनी सोशल मीडिया गतिविधियों के केंद्र में रखती हैं. इससे उनकी वेबसाइट की प्रतिष्ठाबढ़ाने में मदद मिलती है. 

अब बात आती है कि  ब्लॉगिंग शुरू की कैसे जाए.

अगर आपने कभी ब्लॉग नहीं बनाया, तो फ़िक्र न करें. ब्लॉगर, वर्डप्रेस और टम्ब्लर जैसे कई ब्लॉगिंग प्लेटफार्म हैं जिनपर हम मुफ़्त में और बिना किसी तकनीकी ज्ञान के अपना ब्लॉग कुछेक मिनटों में बना सकते हैं. इसके बाद उसे हम किस मुकाम पर ले जाते हैं और उससे क्या लाभ ले पाते हैं, यह हम पर निर्भर करता है, है न?

चूँकि इस लेख में ब्लॉग बनाने का ट्यूटोरियल डालना अटपटा लगेगा, ब्लॉगर प्लेटफार्म पर आनन-फानन में ब्लॉग बनाने के इस लिंक को साझा कर रहा हूँ: How to start a blog when you know nothing about blogging

* लेखक 30 से अधिक वर्षों से मीडिया से जुड़े रहे हैं और सोशल मीडिया और ब्लॉगिंग विषयों पर पैनी नज़र रखते हैं. इन विषयों पर उनकी पुस्तकें ऐमज़ॉन (Amazon) पर उपलब्ध हैं. 

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