सुधीरेन्द्र शर्मा* 'सच' सब सुनना चाहते हैं, लेकिन सच बोलना कोई-कोई! शायद इसलिए सच बोलने से सब कतराते हैं कि कहीं सच को हथियार बनाकर सच-बोलने वाले पर ही उसका...
राजेन्द्र भट्ट* प्राथमिक शिक्षा पर राजेंद्र भट्ट के पिछले लेख ने कई महत्वपूर्ण प्रश्नों को उठाया और जवाब तलाशने की कोशिश भी की। इस विषय पर उनका चिंतन-मनन जारी है। प्रस्तुत लेख में उन्होंने...
Sudhirendar Sharma* Narrating his pathetic experience at a premier hospital recently, a friend painfully concludes that the cash-strapped middle class is literally on its deathbed. Bereft of empathy for the grievously injured, the hospital held back his patient's...
वर्ष 2019 की बैसाखी यानि कल सुबह जलियाँवाला बाग़ की हृदयविदारक घटना को पूरे सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं। बहुत बरस से कयास लगाए जा रहे थे कि शायद 100 वर्ष पूरे होने पर...
Sudhirendar Sharma* Gone are the days when youngsters would scheme to send gullible on a 'fool's errand' to mark April 1st, the most light-hearted day of the year when playing pranks and trying to get people to...
डॉ मधु कपूर* करीब सप्ताह भर पहले हमने दर्शनशास्त्र की अध्येता एवं प्रोफेसर डॉ मधु कपूर का यह लेख (मैं कहता आँखिन देखी) प्रकाशित किया था जिसमें उन्होंने हमारे देखने और...
डॉ मधु कपूर* पिछले कुछ समय से दार्शनिक सिद्धांतों को हमारी वेबपत्रिका के लिए सहज-सुगम शैली में प्रस्तुत कर रहीं डॉ मधु कपूर का यह नौवां लेख है। इससे पूर्व के उनके सभी लेखों...
अपनी हाल ही की जयपुर यात्रा के दौरान मेरी मुलाक़ात हुई पर्यावरणविद और जलयोद्धा लक्ष्मण सिंह जी से जो जयपुर से करीब 80 किमी की दूरी पर स्थित लापोड़िया गाँव से हैं। जल संरक्षण के अपने मौलिक...
Sudhirendar Sharma* Many strange situations have confirmed that life is indeed a paradox, rather a bundle of paradoxes. Like most of you, there was often little on offer when I pushed myself hard but was...
डॉ मधु कपूर* काल का व्यक्तित्व बहु आयामी है। हमारी हर क्रिया में काल कहीं  न कहीं  नेपथ्य में  छिपा रहता है। कोई कहता है यह नित्य अपरिवर्तनीय, निरपेक्ष...

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