राजकाज

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राजकेश्वर सिंह* राजनीति में दो समानांतर काम हमेशा होते रहते हैं। एक सामने से, जो सबको दिखाकर किया जाता है। दूसरा काम पर्दे के पीछे चलता रहता है, जिसके नतीजे किसी खास समय पर...
राजकेश्वर सिंह* ज़रा सोचें कि देश के किसी सरकारी कार्यालय में किसी नागरिक की आमद पर क्या सरकारी मुलाज़िम उसके साथ वैसे पेश आता है, जैसा कि लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में जनता के...
नवनीत चतुर्वेदी 12 जनवरी को आखिरकार उत्तरप्रदेश में बहुप्रतीक्षित समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी यानि  सपा-बसपा गठबंधन का आधिकारिक ऐलान हो ही गया। उत्तरप्रदेश लोकसभा चुनावों की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण राज्य है...
राजकेश्वर सिंह* देश के मौजूदा सारे संकट एक तरफ़ हैं, लेकिन एक नया संकट इन दिनों जेरे बहस है।  इस बहस की धार दिनों-दिन तेज़ होती जा रही है। सवाल बढ़ते जा रहे...
तीन विधान-सभाई चुनावों में हारने के बाद भाजपा और उसकी राजग सरकार जल्दी में नज़र आ रही है। ऐसा लग रहा है कि खोई हुई ज़मीन वापिस पाने के भारतीय जनता पार्टी अपनी सरकार से...
जयशंकर गुप्त* नियति बहुत ही क्रूर और निष्ठुर होती है. उसे क्या पता कि देश और समाज को किसकी कितनी जरूरत है. उसने बीते दो दिनों के भीतर जन सरोकारों से जुड़े सामाजिक...
विजय प्रताप* आज सुबह सवेरे श्री जार्ज फर्नांडीस के न रहने से भारतीय राजनीति में समाजवादी संगठन की राष्ट्रीय पहचान का एक दौर पूरा हुआ। अब आने वाली पीढ़ी 1934 में बनी कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की विरासत...
Vijay Singh* COVID-19 has affected the global economy adversely in every sector including tourism .The rapid spread of coronavirus crippled domestic and trade activities, and disrupted routine activities of many nations bringing their...
This columnist had written a piece for News Webportal the Print (Hindi) a few days back. Just thought to give here a free English rendering of the main points in the above mentioned article.
सिद्धार्थ जगन्‍नाथ जोशी* समाज और राज्य – ये दो तंत्र ऐसे हैं जो प्रकृति के विरुद्ध सर्वाधिक अराजकता पैदा करते हैं। सुनने में अटपटा लगेगा, लेकिन सबसे सफल अराजक तंत्र ही संरक्षित रह...

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