अजीत सिंह*       यह पचास के दशक की बात है। हमारे गांव में समृद्ध परिवारों के दो घर होते थे। ज़नाना और मर्दाना। ज़नाना हिस्से को ‘घर’ कहते थे और मर्दाना हिस्से को...
Manoj Pandey* In our series “Myths Under the Lens” we publish articles scrutinizing subjects that agitate our minds. In this article, MK examines the perennially unresolved issue of extraterrestrial life.
राजेंद्र भट्ट* मीडिया यानि जो संवाद कराए, अकेलेपन को तोड़े और इकतरफा सोच ओर पूर्वाग्रह से बाहर निकाल कर एक समग्र, सुकून देने वाली समझ बनाए। लेकिन हमारे दौर का जो ‘सोशल’ और...
सुधीरेंद्र शर्मा* “जो जाने-माने कवि और गीतकार आनंद बक्शी को नहीं जानता वो हिंदी सिनेजगत से वाकिफ नहीं है”, यह कहना है प्रसिद्ध कवि एवं गीतकार गुलज़ार का और उनका यह कथन हाल ही...
खंडहर नष्ट करो मुझे पूराआधा नष्ट अपमान है निर्माण कामेरा पुनर्निर्माण मत करनामत करना मेरे कंगूरों पर चूना आधे उड़े रंग  वाले भित्तिचित्र ध्वस्त करनाले जाने देना चरवाहे को मेरी...
मनोज पांडे* इस पोस्ट का टाइटल पढ़कर अगर आप चौंक गए हैं, तो कोई बात नहीं. आप अकेले नहीं हैं इस बात पर अचम्भा करने वाले. यह सही है कि मूली, जिसे हम कोई...
विजय प्रताप* भाजपा-आरएसएस प्रतिष्ठान ने पिछले 6 वर्षों में आचरण के तमाम मूल्यों को तिलांजलि देते हुए सामाजिक समरसता को नष्ट करने वाली, पक्षपात-पूर्ण सत्ता की हदें पार कर दी हैं। सरकार के...
Vidya Bhushan Arora First the disclaimers. This author has no academic qualification in law, and has not even studied the judgements or various observations by...
विजय प्रताप* लोकतंत्र  समीक्षा                     यह विमर्श किस लिए सामयिक वार्ता का लोकतंत्र समीक्षा विशेषांक आपके हाथ में है। हम राजनीति एवं समाज परिवर्तन के...
नितिन प्रधान * निवेश की दुनिया में आजकल बिटकॉइन बेहद चर्चा में है। निवेश की इस दुनिया में शायद ही कोई शख्स ऐसा होगा जो बिटकॉइन से परिचित न हो। आजकल बिटकॉइन कई...

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