‘महात्मा के महात्मा’ - सुज्ञान मोदी की पुस्तक का परिचय अगर आपसे प्रश्न किया जाये कि महात्मा गांधी के आध्यात्मिक मार्गदर्शक कौन थे तो शायद आप  उन शख्सियत का नाम ना ले...
Jitendra Ramprakash* At the time of posting this article, it is barely 40 hours that Swami Agnivesh passed away. And in these 40 hours, there is a surge of outpourings by people...
राजेन्द्र भट्ट नक्कारखाने में तूती - 2 पिछली बार ज़िक्र किया था कि गीता में कितने सुंदर तरीके से स्वयं कृष्ण कहते हैं कि अगर जड़ वैराग्य सही रास्ता...
आखिरी पन्ना आखिरी पन्ना उत्तरांचल पत्रिका के लिए लिखा जाने वाला एक नियमित स्तम्भ है। यह लेख पत्रिका के फरवरी 2020 अंक के लिए लिखा गया। 30 जनवरी को जब...
आज की बात कल प्रधानमंत्री मोदी ने रेडियो पर अपने मासिक संभाषण ‘मन की बात’ में करीब छ: मिनट तक कृषि और किसानी की चर्चा की और बताया कि “बरसों से किसानों की...
राजेन्द्र भट्ट नक्कारखाने में तूती – 3 पिछली बार नल-दमयंती की प्रेम- कथा की बात कही थी। नोट कीजिए कि ये प्रेम-कथा हमारे संस्कृत ग्रंथ ‘महाभारत’ में है। बल्कि इस...
ओंकार केडिया* मैं सरहद के इस ओर से देखता हूँ उस ओर की हरियाली, कंटीली तारें नहीं रोक पातीं मेरी लालची नज़रों को.
Mudrarakshasa Recent focus on Aatmnirbharta inevitably graduated to techno-nationalism and very quickly degenerated into conspiracy theories of international plot against India. This gives a new excuse for a fresh round of repressive...
आश्चर्य होता है कि कविता अपना रस, अपना पोषण कहाँ-कहाँ से ढूँढ निकालती है। कवि की नज़र अनछुई, अनजानी जगहों में जैसे बेखौफ घुस जाती है और लगभग एक जासूस की तरह कोने में दुबकी महत्वहीन...
अरविंद सक्सेना* हिन्दी रूपांतर: राजेंद्र भट्ट**               “तुम्हें एक जंतर देता हूँ। जब भी तुम्हें संदेह हो या तुम्हारा अहम तुम पर हावी होने लगे, तो यह कसौटी आज़माओ:...

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