राजेन्द्र भट्ट नक्कारखाने में तूती - 2 पिछली बार ज़िक्र किया था कि गीता में कितने सुंदर तरीके से स्वयं कृष्ण कहते हैं कि अगर जड़ वैराग्य सही रास्ता...
राजेन्द्र भट्ट लगता है कि हम इस समय एक बड़े नक्कारखाने में हैं जिसमें, सीधे-सीधे कहें तो ‘पोस्ट-ट्रुथ’ का शोर, धोंस-पट्टी और बेसुरापन है। सोशल मीडिया ने सम्पादकीय संस्था तथा तथ्यों की पड़ताल के फिल्टर...
आलोक कुमार* सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। देश के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय तक को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के अधीन कर दिया। यह मामला 2010 से लंबित...
आज की बात कुछ चीजों से बचा नहीं जा सकता। जैसे आपने ऐसी वैबसाइट बनाई है जिस पर आप आए दिन किसी ना किसी राजनीतिक-सामाजिक मुद्दे पर टिप्पणी करते रहते हैं...
आलोक कुमार आज बीते सदी के नायक महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मना रहे हैं। वह इंसानियत के अद्भूत ब्रांड एम्बेसडर रहे। दुनिया में भारत की धवल पहचान बनाने में गांधी का...
आखिरी पन्ना ‘आखिरी पन्ना’ उत्तरांचल पत्रिका के लिए लिखा जाने वाला एक नियमित स्तम्भ है। यह लेख पत्रिका के अक्तूबर 2019 अंक के लिए लिखा गया। जब...
अरविंद मोहन* गाँधी की पत्रकारिता बहुत बड़ा विषय है- शायद मेरे जैसे लोगों से न सम्हलने वाला। उनके एक अखबार ‘इंडियन ओपिनियन’ पर वर्षों का समय लगाकर एलिजाबेथ हाफ्मेयर ने ‘द गाँधी प्रेस’ जैसी...
Astha Savyasachi* Recently over 150 children died in Muzaffarpur district of Bihar due to Acute Encephalitis Syndrome (AES) or popularly known as ‘chamki bukhar’ in extremely unfortunate circumstances, which could have been easily prevented. In 2017...
अजय तिवारी* बिहार में चमकी बुखार से 140 से अधिक बच्चों की मौत ने आगे बढ़ते भारत का नाम दुनिया में काफी खराब किया है। इन मौतों की वजह सिर्फ हमारी स्वास्थ्य सेवाओं...
आखिरी पन्ना* यह लिखे जाने के समय देश चुनाव परिणाम आ जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में फिर एक बार नई सरकार के गठन की प्रतीक्षा कर रहा है। कई तरह के...

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