राजकेश्वर सिंह* लोकसभा चुनाव के पहले चरण में हुआ फीका मतदान कुछ ज्यादा चौकाने वाला नहीं है। यह आशंका तो पहले से ही थी, क्योंकि चुनाव आयोग और सरकारी मशीनरी की सारी कोशिशों के...
राजेन्द्र भट्ट* राजेन्द्र भट्ट नए-नए साहित्यिक प्रयोग करते रहते हैं। उनकी प्रयोगशाला हमारी वेबपत्रिका है। अभी दो-चार रोज़ पहले उनका ऐसा ही प्रयोग "मूली लौट आई" के साथ...
विभिन्न दार्शनिक सिद्धांतों से परिचित होने के लिए पिछले कुछ सप्ताह में डॉ मधु कपूर के चार लेख आप पहले पढ़ चुके हैं। आज के अपने लेख में...
डॉ मधु कपूर* द्वारा पुस्तक समीक्षा प्रमुख भाषाविद एवं भाषा विज्ञानी डॉ सुरेश पंत की पिछले वर्ष प्रकाशित हुई बहुचर्चित पुस्तक ‘शब्दों के साथ-साथ’ का दूसरा भाग भी हाल ही में प्रकाशित...
सुधीरेन्द्र शर्मा* 'सच' सब सुनना चाहते हैं, लेकिन सच बोलना कोई-कोई! शायद इसलिए सच बोलने से सब कतराते हैं कि कहीं सच को हथियार बनाकर सच-बोलने वाले पर ही उसका...
ओंकार केडिया* की कविताएं आप इस वेब पत्रिका में पहले भी पढ़ चुके हैं। पूर्व में प्रकाशित उनकी अनेक कविताओं में से कुछ आप यहाँ, यहाँ और यहाँ पढ़ सकते हैं। उनका कविता संग्रह इन्द्रधनुष भी...
डॉ मधु कपूर* विभिन्न दार्शनिक सिद्धांतों से परिचित होने के लिए पिछले कुछ सप्ताह में डॉ मधु कपूर के तीन लेख आप पहले पढ़ चुके हैं। पहला था “मैं कहता आँखिन देखी” और...
सत्येंद्र प्रकाश* सत्येंद्र प्रकाश इस वेब पत्रिका पर पिछले कुछ समय से निरंतर लिख रहे हैं और मानव मन की अतल गहराइयों को छू सकने की अपनी क्षमता से हमें अच्छे से वाक़िफ करवा...
(Last Part) Undoing Historical Injustice or Politics of Vendetta? How can we reclaim our temples? Dr Uma Shankari* It is...
डॉ मधु कपूर* पिछले दो सप्ताह में डॉ मधु कपूर के दो लेख आप पहले पढ़ चुके हैं। पहला था “मैं कहता आँखिन देखी” और दूसरा “कालः पचतीति वार्ता”  -...

RECENT POSTS