आलोक कुमार आज बीते सदी के नायक महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मना रहे हैं। वह इंसानियत के अद्भूत ब्रांड एम्बेसडर रहे। दुनिया में भारत की धवल पहचान बनाने में गांधी का...
राजेन्द्र भट्ट इस कोरोना-काल में ऐसे वाकये से बात शुरू करना अच्छा लग रहा है जिससे दुष्यंत कुमार की पंक्तियाँ याद आ गईं– ‘इस अंधेरी कोठरी में एक रोशनदान है।’ ये रोशनदान नोएडा...
आलोक कुमार* सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। देश के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय तक को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के अधीन कर दिया। यह मामला 2010 से लंबित...
10 मई को प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम की जयंती पर विशेष राजेंद्र भट्ट 10 मई को भारत के 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम की एक और जयंती होगी। ...
राजेन्द्र भट्ट लगता है कि हम इस समय एक बड़े नक्कारखाने में हैं जिसमें, सीधे-सीधे कहें तो ‘पोस्ट-ट्रुथ’ का शोर, धोंस-पट्टी और बेसुरापन है। सोशल मीडिया ने सम्पादकीय संस्था तथा तथ्यों की पड़ताल के फिल्टर...
A society where everyone has acquired a legitimacy of a soldier (for maintaining an imaginary nation)  is a society where exercise of basic individual expressions come with prohibitive cost. Mudrarakshasa
विजय प्रताप आज मुझे ऐसे लोगों के बीच बोलते हुए बहुत अच्छा लग रहा है जो धर्म तथा जाति की किसी दीवार को नहीं मानते। वे केवल इंसानियत की जात पर ही...
राजेन्द्र भट्ट नक्कारखाने में तूती - 2 पिछली बार ज़िक्र किया था कि गीता में कितने सुंदर तरीके से स्वयं कृष्ण कहते हैं कि अगर जड़ वैराग्य सही रास्ता...
There is a strategy of keep lobbing grenades into the fault lines of society without any evidence and that will crowd out the actual news and will keep the people (experts and journalists included) busy with...
“The odd thing about assassins, Dr. King, is that they think they have killed you” - A Bill Mauldin cartoon in The Chicago Sun Times - Gandhi talking to Dr. Martin Luther...

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