विजय प्रताप आज मुझे ऐसे लोगों के बीच बोलते हुए बहुत अच्छा लग रहा है जो धर्म तथा जाति की किसी दीवार को नहीं मानते। वे केवल इंसानियत की जात पर ही...
Mudrarakshasa As one rare genuine local artform Cinema can provide intellectual leadership but it is under threat Literature, politics and bureaucracy are hobbled by their compulsions of foreign markets. Middle class...
राजेन्द्र भट्ट इस कोरोना-काल में ऐसे वाकये से बात शुरू करना अच्छा लग रहा है जिससे दुष्यंत कुमार की पंक्तियाँ याद आ गईं– ‘इस अंधेरी कोठरी में एक रोशनदान है।’ ये रोशनदान नोएडा...
क्या है भारत माता? क्या है अपना भारत? पंडित नेहरू की पुण्यतिथि पर राजेन्द्र भट्ट* की आज के संदर्भ में प्रासंगिक श्रद्धांजलि आज 27 मई है - पंडित नेहरू...
Mudrarakshasa Big-tech, especially the global social media, is the latest god that has failed. For a very long time, these giants were the harbinger of hope, innovation and source of unprecedented wealth through...
A review of Pratap Bhanu Mehta's Talk on 'The Crisis of Democracy in India' by Mudrarakshasa. This Talk is available on the Youtube Channel of the Print. (Link is available in the text below).
Mudrarakshasa Mudrarakshasa has written a series of articles for this web-magazine wherein he has dwelt upon the ongoing tussle between the Right and the Left across the world and in India. In this...
राजेन्द्र भट्ट नक्कारखाने में तूती – 3 पिछली बार नल-दमयंती की प्रेम- कथा की बात कही थी। नोट कीजिए कि ये प्रेम-कथा हमारे संस्कृत ग्रंथ ‘महाभारत’ में है। बल्कि इस...
व्यंग्य रचना राजेन्द्र भट्ट* पिछली दो कड़ियों में (यहाँ और यहाँ) हम घृणा के टूलकिट को काफी अचूक और कारगर बना चुके हैं। अब देखें कि इसके इस्तेमाल के...
राजेन्द्र भट्ट* मशहूर शायर मजाज़ ने एक बिम्ब का इस्तेमाल किया है – ज़ंजीरे-हवा। यानि हवा में ज़ंजीर बना कर किसी को बांधने की कोशिश। गांधीजी और उनके प्रभाव को शब्दों की चौखट...

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