राजेन्द्र भट्ट लगता है कि हम इस समय एक बड़े नक्कारखाने में हैं जिसमें, सीधे-सीधे कहें तो ‘पोस्ट-ट्रुथ’ का शोर, धोंस-पट्टी और बेसुरापन है। सोशल मीडिया ने सम्पादकीय संस्था तथा तथ्यों की पड़ताल के फिल्टर...
आलोक कुमार* सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। देश के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय तक को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के अधीन कर दिया। यह मामला 2010 से लंबित...
आलोक कुमार आज बीते सदी के नायक महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मना रहे हैं। वह इंसानियत के अद्भूत ब्रांड एम्बेसडर रहे। दुनिया में भारत की धवल पहचान बनाने में गांधी का...
अरविंद मोहन* गाँधी की पत्रकारिता बहुत बड़ा विषय है- शायद मेरे जैसे लोगों से न सम्हलने वाला। उनके एक अखबार ‘इंडियन ओपिनियन’ पर वर्षों का समय लगाकर एलिजाबेथ हाफ्मेयर ने ‘द गाँधी प्रेस’ जैसी...
Astha Savyasachi* Recently over 150 children died in Muzaffarpur district of Bihar due to Acute Encephalitis Syndrome (AES) or popularly known as ‘chamki bukhar’ in extremely unfortunate circumstances, which could have been easily prevented. In 2017...
अजय तिवारी* बिहार में चमकी बुखार से 140 से अधिक बच्चों की मौत ने आगे बढ़ते भारत का नाम दुनिया में काफी खराब किया है। इन मौतों की वजह सिर्फ हमारी स्वास्थ्य सेवाओं...
डॉ गोपाल कृष्‍ण* भारत सरकार सभी प्रकार के एस्बेस्टस के खनन और एस्बेस्टस कचरे के व्यापार  पर प्रतिबंध को लेकर ज़रूरी सहमति बनाने में नाकाम रही है। उसने जिनेवा बैठक में हानिकर रसायनों की संयुक्त...
डॉ गोपाल कृष्‍ण* इन दिनों स्विट्ज़रलैंड की राजधानी जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र की परिसंकटमय जहरीले रसायनों के विषय पर एक सम्मलेन चल रहा है। यह सम्मलेन 29 अप्रैल को शुरू हुआ और 10 मई को समाप्त होगा।...
इस सरकार ने मीडिया के पतन को सार्वजनिक कर दिया है और अब कुछ भी छिपा नहीं रहा। चिंता की बात ये है कि यदि सरकार बदल भी जाती है तो भविष्य की सरकारों को यह...
सुदीप ठाकुर* कल टिवीटर पर अचानक ये खबर दिखने लगी कि भारत के उच्चतम न्यायालय ने वन्य जीवों के संरक्षण में लगे संगठनों और कुछ पूर्व वनाधिकारियों की एक याचिका पर फैसला सुनाया और...

RECENT POSTS