मनोहर चमोली ‘मनु’ हिन्दी या यूं कहें कि हिन्दुस्तानी भाषा के सार्थक उपयोग की सरल, उपयोगी, व्यावहारिक और आसानी से उपलब्ध पुस्तकें प्रायः बहुत ही कम है। हाल ही में जाने-माने भाषाविद डॉ॰...
Vidya Bhushan Arora Vir Sanghvi’s principal at Mayo told his mother that he found Vir a little arrogant, but the boy had become serious and responsible after his father died. It would be interesting...
विनोद रिंगानिया* आप किसी जगमगाते आयोजन में जाते हैं जहाँ हर कोई अपनी खास वेशभूषा से लोगों को आकर्षित करना चाहता है। लेकिन यह जगमग कहीं न कहीं एक बोरियत और ऊब पैदा करती...
राजेंद्र भट्ट 'कागद कारे' कैटेगरी में पुस्तक-समीक्षाएं पहले भी प्रकाशित होती रही हैं और सामान्य अर्थ में राजेन्द्र भट्ट का यह लेख पुस्तक-समीक्षा ही है लेकिन चूंकि समीक्षा आम तौर पर नई प्रकाशित...
Suresh Pant* These prison notes are true tales from "jail within a jail" told by an activist author B. Anuradha who had been a political prisoner herself in Hazaribag jail for about four years...
डॉ मधु कपूर* बहाना भाषा का, ख़ज़ाना शब्दों का जाने-माने भाषाविद डॉ सुरेश पंत की पिछली पुस्तक “शब्दों के साथ-साथ” खूब चर्चित रही और एक वर्ष की अल्प-अवधि में...
ओम निश्चल* पारुल बंसल की कविताएं इस वेबपत्रिका में प्रकाशित होती रही हैं और इस पत्रिका के पाठक स्त्री अस्मिता पर लिखी उनकी रचनाओं से बखूबी वाकिफ़ हैं। हाल ही में...
नरेश शांडिल्य* द्वारा मोहन राणा के कविता संग्रह 'एकांत में रोशनदान' की समीक्षा मोहन राणा इस वेब-पत्रिका के लिए नए नहीं हैं। उनकी कुछ कविताएं (उनके संक्षिप्त परिचय के साथ) आप यहाँ और...
पुस्तक-परिचय : गिरीश कर्नाड की आत्मकथा 'यह जीवन खेल में' राजेंद्र भट्ट* ‘यह जीवन खेल में’ हार्पर कॉलिन्स से प्रकाशित गिरीश कर्नाड की आत्मकथा के अंग्रेजी संस्करण ‘दिस लाइफ...
सुधीरेन्द्र शर्मा* 35 वर्ष पूर्व ईरान के धार्मिक और राजनीतिक नेता अयातुल्लाह ख़ुमैनी ने भारत में जन्मे ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी के ख़िलाफ़ फ़रवरी 1989 में फतवा जारी किया था  जिसमें उन्होंने रुश्दी...

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