राजेंद्र भट्ट 'कागद कारे' कैटेगरी में पुस्तक-समीक्षाएं पहले भी प्रकाशित होती रही हैं और सामान्य अर्थ में राजेन्द्र भट्ट का यह लेख पुस्तक-समीक्षा ही है लेकिन चूंकि समीक्षा आम तौर पर नई प्रकाशित...
शुभम मिश्र* जिन्होंने पहले भी कई उर्दू पुस्तकों का अनुवाद किया है, हाल ही में दिल्ली पर राजेंद्र लाल हांडा द्वारा जनवरी 1951 में प्रकाशित उर्दू पुस्तक “दिल्ली जो एक शहर था” का अनुवाद किया है। इसी...
पुस्तक-परिचय : गिरीश कर्नाड की आत्मकथा 'यह जीवन खेल में' राजेंद्र भट्ट* ‘यह जीवन खेल में’ हार्पर कॉलिन्स से प्रकाशित गिरीश कर्नाड की आत्मकथा के अंग्रेजी संस्करण ‘दिस लाइफ...
An Introduction and Review When I came across an educational book published by Britannica on the 100 most influential women of all time some years back, it was kind of a disappointment to see...
गोबिन्द प्रसाद* इस वेब-पत्रिका के पाठक मोहन राणा के नाम से अपरिचित नहीं हैं। उनकी कुछ कवितायें आप इस पोर्टल पर यहाँ और यहाँ पढ़ चुके हैं। दिल्ली में जन्मे मोहन राणा पिछले दो...
Suresh Pant* These prison notes are true tales from "jail within a jail" told by an activist author B. Anuradha who had been a political prisoner herself in Hazaribag jail for about four years...
Vidya Bhushan Arora Vir Sanghvi’s principal at Mayo told his mother that he found Vir a little arrogant, but the boy had become serious and responsible after his father died. It would be interesting...

RECENT POSTS