कागद कारे

कागद कारे

पूनम जैन* राम तो बसते हैं हर कण में, हर मन मेंवो हो श्रमिक, किसान या दलित हर जन मेंजहां इनका श्रम है, वहीं राम का मन्दिर हैइस धरती,...
कर्नल अमरदीप* इस वेबपत्रिका के लिए नए नहीं हैं। आप पहले भी उनकी कवितायें यहाँ देख सकते हैं। आज प्रकाशित की जा रही ये दोनों कवितायें सुकोमल अनुभूतियों की ...
ओंकार केडिया* मास्क - 1 तुम्हारे मुँह और नाक पर मास्क लगा है, पर तुम बोल सकते हो,
ओंकार केडिया* मुझे नहीं देखने शहरों से गाँवों की ओर जाते अंतहीन जत्थे, सैकड़ों मील की यात्रा पर निकले थकान से...
Ajeet Singh* (Radio-Vaani 2) World media had assembled in Simla (now Shimla) for the coverage of the historic Simla Summit between India and Pakistan in July 1972...
मनोज पांडे* कैक्टस हँस रहे हैं – एक वर्षों से बरबस बरसती गर्म रेत,टीला बनाते-बिगाड़ते अंधड़ोंऔर सूखा उगलती रातों के बादआज यहां टपक रही हैं बूँदेंजलती ज़मीन पर.
Ajeet Singh* (Radio-Vaani 7) - Special on Kargil Vijay Divas 26th July Kargil was largely a deserted town when our cavalcade reached here in the midst...
Smita Vats Sharma Do you recollect the FB picture of that radiant school friend of mine as she stood next to her newly minted MBA son at his graduation ceremony? And that one...
इस वेब-पत्रिका में अजंता देव की कविताओं की यह तीसरी कड़ी है। पहले आप उनकी कविताएं यहाँ और यहाँ पढ़ चुके हैं। इस बार की कविताएं कुछ अलग मिजाज़ की हैं लेकिन फिर भी जिन लोगों...
बिना किसी पूर्व-चेतावनी के हुए लॉक-डाउन ने देश के बड़े शहरों में रह रहे दिहाड़ी मज़दूरों को जिस तरह अचानक बेघर कर दिया और उन्हें जिन हालातों में पैदल ही सैंकड़ों मील चलकर अपने घरों को लौटना...

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