कागद कारे

कागद कारे

Ajeet Singh* (Radio-Vaani 5) Mrs Ekka, my neighbour’s wife suddenly held me by both my wrists and asked me to tell the truth as I stood at the entrance of...
मनोज पाण्डे* पग-पग जमी घूल से उठते सिरों का जमघटढक लेता माटी को,पतझड़ कुछ ज़्यादा हुआ सा. अधूरी इच्छाओं को दांतों से मसलकरहँसते होंठ खिसियाई हँसी को,
पारुल बंसल* क्षणिकाएं एक - प्रेम ने सुनी सिसकी कानों से और आ गया आंखों के रास्ते से!
पूनम जैन* कल बिहार विधानसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा होते ही एकबारगी फिर याद ताज़ा हो आई उन प्रवासी मज़दूरों की जिन्हें कुछ माह पहले अचानक ही अपने घरों को लौटने को...
Ajeet Singh* (Radio-Vaani 3) The CRPF inspector saluted me as he entered my office at Radio Kashmir Srinagar, in tow with two women constables. I knew him well. He was...
राकेशरेणु* स्त्री - एक एक दाना दोवह अनेक दाने देगीअन्न के। एक बीज दोवह विशाल वृक्ष सिरजेगीघनी छाया और फल के। एक कुआँ खोदोवह जल...
ओंकार केडिया* एक उदास सी चिड़िया वक़्त-बेवक्त कभी भी आ जाती है मुझसे मिलने, मेरा हाल जानने!
खंडहर नष्ट करो मुझे पूराआधा नष्ट अपमान है निर्माण कामेरा पुनर्निर्माण मत करनामत करना मेरे कंगूरों पर चूना आधे उड़े रंग  वाले भित्तिचित्र ध्वस्त करनाले जाने देना चरवाहे को मेरी...
पारुल हर्ष बंसल*     -1- चाहत तुमने मुझे चाहा  और मैंने तुम्हें चाहा रहमत बरसाए उनपे खुदा जिन्होंने तुम्हें और मुझे...
  सोते जागते यहीं कहीं जो रह जाता फिर वहीं भूल कर याद रह जाता मैंने रोपा था उखड़े पेड़ की छाया को आकाश के संताप को अपने सीने पर सांस भर एक दम

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