कागद कारे

कागद कारे

अमरदीप* सिर्फ धूप पहनना सुनो आज तुम धूप पहनना सिर्फ धूप सजा लेना अपनी माँग में!
Onkar Kedia*  “Do you know what happens after death?” he asked me. “How will you know? You have never died,” he answered his own question. “What nonsense,” I was livid. “Even...
शक़ कहानी की पृष्ठभूमि असम का बोड़ो जनजातीय इलाका है। कब बोड़ो अस्मिता के लिए शुरू हुई जद्दोजहद शांतिपूर्ण आंदोलन से खिसककर आतंकवाद की गोद में चली गई यह इस कहानी में बड़े ही स्वाभाविक तरीके...
ओंकार केडिया* उन्होंने कहा, मरने के लिए तैयार रहो, सारा इंतज़ाम है हमारे पास- गोली, चाकू, डंडा, फंदा, तुम ख़ुशकिस्मत हो,
Onkar Kedia* He was a poet or so he claimed and always on a look out for people who could listen to his verses. I was one...
अजीत सिंह*         कैमला, जो चंद रोज़ पहले तक एक अज्ञात सा गांव था, हाल ही में मीडिया की सुर्खियों में आया है। गत रविवार दस जनवरी को हरियाणा के मुख्यमंत्री को वहां...
मनोज पांडे* कैक्टस हँस रहे हैं – एक वर्षों से बरबस बरसती गर्म रेत,टीला बनाते-बिगाड़ते अंधड़ोंऔर सूखा उगलती रातों के बादआज यहां टपक रही हैं बूँदेंजलती ज़मीन पर.
  सोते जागते यहीं कहीं जो रह जाता फिर वहीं भूल कर याद रह जाता मैंने रोपा था उखड़े पेड़ की छाया को आकाश के संताप को अपने सीने पर सांस भर एक दम
ज्योति शर्मा* काली मैना (ससुराल से वापस आने के बाद एक बेटी कीअपनी माँ से बातचीत ) संस्कारों की पोटली इतनी भारीकि उसको ढोते-ढोते मैंने...
इस वैबसाइट पर कविता के पाठक अजंता देव की कविताएं पहले भी पढ़ चुके हैं। वह अपनी कविताओं में आजकल विविध प्रयोग कर रही हैं। कभी हम उनसे इन प्रयोगों के बारे में एक लेख अलग...

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