ओंकार केडिया* की कविताएं आप इस वेब पत्रिका में पहले भी पढ़ चुके हैं। पूर्व में प्रकाशित उनकी अनेक कविताओं में से कुछ आप यहाँ, यहाँ और यहाँ पढ़ सकते हैं। उनका कविता संग्रह इन्द्रधनुष भी...
अजंता देव हिन्दी कविता जगत की सुपरिचित कवि अजंता देव को पिछले दिनों राजस्थान साहित्य अकादमी की ओर से विशिष्ट साहित्यकार पुरस्कार के लिए चुना गया है। इस वेब-पत्रिका की ओर से जब...
पारुल बंसल* स्त्री के अमूल्य प्रहर स्त्री चौके में सिर्फ रोटियां ही नहीं बेलती वह बेलती है अपनी थकान पचाती है दुःख
पारुल हर्ष बंसल*     -1- चाहत तुमने मुझे चाहा  और मैंने तुम्हें चाहा रहमत बरसाए उनपे खुदा जिन्होंने तुम्हें और मुझे...
सत्येन्द्र प्रकाश* सत्येन्द्र प्रकाश जिनका पूरा परिचय आप लेख के अंत में देख सकते हैं, इस वेब-पत्रिका के लिए पिछले कुछ सप्ताह से नियमित लिख रहे हैं लेकिन आज का यह व्यंग्य उनके...
प्रेम चंद जयंती (31 जुलाई) पर विशेष राजेंद्र भट्ट* पिछले वर्ष प्रेमचंद जयंती (31 जुलाई 2020)  के अवसर पर रागदिल्ली में अपने लेख में मैंने उनकी...
सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताओं के बहाने राजेन्द्र भट्ट ने इस लेख में यह सिफ़ारिश की है कि कविताओं को पढ़ते-गुनते समय अगर आप अपना बुद्धिजीवी और अति-गंभीर होने का आग्रह छोड़ कर समालोचना करेंगे तो इस...
ओंकार केडिया* उन्होंने कहा, मरने के लिए तैयार रहो, सारा इंतज़ाम है हमारे पास- गोली, चाकू, डंडा, फंदा, तुम ख़ुशकिस्मत हो,
पारुल बंसल* क्षणिकाएं एक - प्रेम ने सुनी सिसकी कानों से और आ गया आंखों के रास्ते से!
Smita Vats Sharma Do you recollect the FB picture of that radiant school friend of mine as she stood next to her newly minted MBA son at his graduation ceremony? And that one...

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