कागद कारे

कागद कारे

प्रेमचंद की जयंती पर राजेन्द्र भट्ट* की श्रद्धांजलि प्रेमचंद की प्रासंगिकता स्वत:सिद्ध है लेकिन फिर भी इस विषय पर लिखने की उस समय तत्काल ज़रूरत महसूस हुई जब पिछले दिनों हिन्दी की एक...
ओंकार केडिया* मैं सरहद के इस ओर से देखता हूँ उस ओर की हरियाली, कंटीली तारें नहीं रोक पातीं मेरी लालची नज़रों को.
Onkar Kedia* He was a poet or so he claimed and always on a look out for people who could listen to his verses. I was one...
Smita Vats Sharma Do you recollect the FB picture of that radiant school friend of mine as she stood next to her newly minted MBA son at his graduation ceremony? And that one of...
........अनुवाद - राजेंद्र भट्ट 2018 का वर्ष अपने हिसाब से इतिहास में तोड़-मरोड़, देशद्रोह और देशभक्ति के सर्टिफिकेट देने और बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं बनाने के गौरव-यशोगान में पिछले वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ता...
आश्चर्य होता है कि कविता अपना रस, अपना पोषण कहाँ-कहाँ से ढूँढ निकालती है। कवि की नज़र अनछुई, अनजानी जगहों में जैसे बेखौफ घुस जाती है और लगभग एक जासूस की तरह कोने में दुबकी महत्वहीन...
1. चल पड़े भ्रम मनोज पाण्डे* अपनी पुरानी घड़ीइतराती थीजब चलती थीटक टक कर। शांत हो जाती थी,जब  रुकती थीथक थक कर। तब हिलाते थेथप-थपाते थेचलती घड़ी से मिलाते थे। धुंधलाए...
ओंकार केडिया* उन्होंने कहा, मरने के लिए तैयार रहो, सारा इंतज़ाम है हमारे पास- गोली, चाकू, डंडा, फंदा, तुम ख़ुशकिस्मत हो,
पूनम जैन* राम तो बसते हैं हर कण में, हर मन मेंवो हो श्रमिक, किसान या दलित हर जन मेंजहां इनका श्रम है, वहीं राम का मन्दिर हैइस धरती,...
*Onkar Kedia Is this a Short story? Perhaps not! Read on to see.... ‘Do you know, I had no idea about spying. Learnt it the hard way'.

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