आईने आईने देखना मैंने बहुत बाद में जाना बचपन में तो मौसियां बना देती थीं मेरे बालों की दो चोटियां
अजंता देव*        वह थोड़ा हंसा और सोचने लगा कि री की नज़र कहाँ-कहाँ जाती थी। उसे कई बार अपना जीवन बेस्वाद लगता था - वही एक कमरा, वही एक काम। सुबह से...
पुष्पिता अवस्थी* 1. वसंत धरती से उपजता है वसंत अंगड़ाई लेता हुआ हवाओं में  बदल देता है पृथ्वी को अपनी ही प्रकृति...
1 - ज़िन्दगी के इस सफ़र में आये कैसे मरहलेबघनखे हाथों में लेकर लोग मिलते हैं गले ! मैं जिरहबख़्तर पहनकर घूमता हूं शहर मेंऔर आख़िर दूर करता हूं दिलों...
क्षणिकाएं १- एक पंक्ति जब मचाती हैअंतर्द्वंद मध्यरात्रिभोर तक उसकादम घुट चुका होता है२-बड़ी बेचैन थी वो पंक्तिखुद को पन्ने परन्योछावर करने कोऔर अपनी काया परचित्रकारी पाने को३-पंक्तियों का पंक्तिबद्ध ना होनाअर्थ के अनर्थ...
राकेशरेणु* स्त्री - एक एक दाना दोवह अनेक दाने देगीअन्न के। एक बीज दोवह विशाल वृक्ष सिरजेगीघनी छाया और फल के। एक कुआँ खोदोवह जल...
Satish Pandya*                                                            Is she awake? Yes. Vicky’s pampered spouse, Nancy, gets up with a lazy yawn after her suave hubby coaxes her by patting her bare midriff, and placing a...
विपुल मयंक* प्रिंसि का ऑफ़िस भरा था – खचाखच। टीचर्स, डीन, स्टूडेंट्स यूनियन के मेंबर्स, प्रिन्सपल खुद और था एक्यूसड् – आलोक जोशी।    आलोक कॉलेज का फेमस डिबेटर था। कल हॉस्टल...
Rocky Gauri* 1. The Truth pen Old pen died drawing Its final word-- beautiful Young pen begins drawing Its first word –...
पारुल हर्ष बंसल*     -1- चाहत तुमने मुझे चाहा  और मैंने तुम्हें चाहा रहमत बरसाए उनपे खुदा जिन्होंने तुम्हें और मुझे...

RECENT POSTS