प्रेम चंद जयंती (31 जुलाई) पर विशेष राजेंद्र भट्ट* पिछले वर्ष प्रेमचंद जयंती (31 जुलाई 2020)  के अवसर पर रागदिल्ली में अपने लेख में मैंने उनकी...
Ajeet Singh* (Radio-Vaani 7) - Special on Kargil Vijay Divas 26th July Kargil was largely a deserted town when our cavalcade reached here in the midst...
कर्नल अमरदीप* इस वेबपत्रिका के लिए नए नहीं हैं। आप पहले भी उनकी कवितायें यहाँ देख सकते हैं। आज प्रकाशित की जा रही ये दोनों कवितायें सुकोमल अनुभूतियों की ...
1. खड़ीक* का पेड़ मैं किसी को नहीं जानता था मैं सबको भूल जाऊँगा   पर मैं पत्थर था बहते पानी में
संकल्प घूम-घूम कर आता है  वह ज़िद्दी मच्छर, भिनभिनाता है  मेरे कानों के पास, जैसे बजा रहा हो 
Ajeet Singh* (Radio-Vaani 6) Journalists are witness to history being made. They write the first rough draft of history through their daily accounts of events which they go on revising periodically....
सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताओं के बहाने राजेन्द्र भट्ट ने इस लेख में यह सिफ़ारिश की है कि कविताओं को पढ़ते-गुनते समय अगर आप अपना बुद्धिजीवी और अति-गंभीर होने का आग्रह छोड़ कर समालोचना करेंगे तो इस...
Ajeet Singh* (Radio-Vaani 5) Mrs Ekka, my neighbour’s wife suddenly held me by both my wrists and asked me to tell the truth as I stood at the entrance of...
अजीत सिंह* (रेडियो-वाणी 4) रेडियो कश्मीर से काफी यादें जुड़ी हैं जिनमें से एक मैंने पिछली बार साझा की थी। अफसोस की बात ये है कि धरती का स्वर्ग कहे...
पारुल बंसल* स्त्री के अमूल्य प्रहर स्त्री चौके में सिर्फ रोटियां ही नहीं बेलती वह बेलती है अपनी थकान पचाती है दुःख

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