*Onkar Kedia Is this a Short story? Perhaps not! Read on to see.... ‘Do you know, I had no idea about spying. Learnt it the hard way'.
शोभना तनेजा स्त्री मन की गहन अनुभूतियों और अनुराग की कवियत्री हैं। उनके 'हायकू' भी सूक्तियों की तरह अभिभूत करते हैं। ये मन को कहीं गहरे छू लेने वाली, निर्मल और गहन अनुराग की सरल कविताएं हैं...
मनोज पाण्डे* पग-पग जमी घूल से उठते सिरों का जमघटढक लेता माटी को,पतझड़ कुछ ज़्यादा हुआ सा. अधूरी इच्छाओं को दांतों से मसलकरहँसते होंठ खिसियाई हँसी को,
डा. शैलेन्द्र त्रिपाठी* 1. समझो तो समझ लो इशारा ना करेंगेरोकर अपनी बात दोबारा न करेंगे।
Continuing experiment with his musings on a variety of subjects  through conversations, Onkar Kedia* writes another piece for us. His earlier piece can be seen here. I was surprised to see him. With no hair...
पारुल बंसल* प्रेमांकुर ऐ फौलादी जिगर के स्वामी!  हृदय की गागर को  रीता कर देना  मेरे वियोग...
ओंकार केडिया* उन्होंने कहा, मरने के लिए तैयार रहो, सारा इंतज़ाम है हमारे पास- गोली, चाकू, डंडा, फंदा, तुम ख़ुशकिस्मत हो,
पारुल हर्ष बंसल* एक चुटकी सिंदूर  एक चुटकी सिंदूर,  जिसकी क्रय वापसी है अति दुर्लभ। आ गिरी दामन में...
Onkar Kedia* He was a poet or so he claimed and always on a look out for people who could listen to his verses. I was one...
ओंकार केडिया* इन उजड़ी झोंपड़ियों के आसपास कुछ टूटी चूड़ियां हैं,कुछ बदरंग बिंदियाँ हैं,कुछ टूटे फ्रेम हैं चश्मों के,कुछ तुड़ी-मुड़ी कटोरियाँ हैं.यहाँ कुछ अधजली बीड़ियाँ हैं,कुछ...

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