1. खड़ीक* का पेड़ मैं किसी को नहीं जानता था मैं सबको भूल जाऊँगा   पर मैं पत्थर था बहते पानी में
विपुल मयंक* असलम का दोस्त था इरफ़ान। पकिया। दोनों क्लास दस में थे - एक ही स्कूल में! असलम की कोठी के बग़ल में थी इरफ़ान की कोठी। दोनों कोठियों के बड़े अहाते...
विपुल मयंक* प्रिंसि का ऑफ़िस भरा था – खचाखच। टीचर्स, डीन, स्टूडेंट्स यूनियन के मेंबर्स, प्रिन्सपल खुद और था एक्यूसड् – आलोक जोशी।    आलोक कॉलेज का फेमस डिबेटर था। कल हॉस्टल...
ओंकार केडिया परिंदों! मत इतराओ इतना और भ्रम में मत रहना कि यह दुनिया अब हमेशा के लिए तुम्हारी हुई!
Ajeet Singh* (Radio-Vaani 1) During my reporting assignments for the AIR and Doordarshan News which I did for almost three decades, there were several occasions when I met celebrities, even...

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