Sudhirendar Sharma* Each of us have multiple identities, which for the sake of convenience, can be broadly clubbed under two categories ie., what we reflect ‘outward’ as a bio-physical person, and the one...
    मधुकर पवार* थियेटर में नाटक का मंचन हो रहा है। ज़मींदार को उनका कारिंदा किसी मुद्दे पर सलाह देने को आतुर हो रहा है लेकिन अदब के कारण कहने से सकुचा भी...
Rajesh Jha* A Note from the Editor - In this age of information, there often is a debate on how governments should give out information on its activities, how much publicity is ethically correct...
Nitin Wakankar* As internal strife in Sudan escalates and the African nation could turn into a playground for global powers and as foreign nationals including our fellow citizens attempt to flee, watching and reading...
Nitin Wakankar* It has been over three months since I retired. These are musings on my first impressions of life in this new environment. Retirement can be a cathartic event, an abrupt end to...
राजेंद्र भट्ट शिक्षा पर मेरे पिछले लेखों (यहाँ, यहाँ और  यहाँ,  और हाल ही में मुदित प्रसंग के बहाने यहाँ और यहाँ) में आए मुद्दों के अलावा एक और मुद्दे की तरफ ध्यान...
राजेन्द्र भट्ट शिक्षा पर मेरे पिछले लेखों (यहाँ, यहाँ और  यहाँ) के बाद पिछली बार (शिक्षा:मुदित-प्रसंग -1) में हम मुदित के, ‘मुदित’ बने रहने के संघर्ष के प्रसंग से दो-चार हुए। अब मुदित-प्रसंग...
राजेंद्र भट्ट शिक्षा पर पिछले लेखों ( यहाँ, यहाँ और  यहाँ, ) में मैंने निवेदन किया था कि इस   व्यापक विषय है पर समग्रता से लिख पाने का दावा (मेरे जैसे सीमित क्षमता...
राजेन्द्र भट्ट* प्राथमिक शिक्षा पर राजेन्द्र भट्ट का चिंतन-मनन जारी है। इस विषय पर उनके पिछले दो लेख आप यहाँ और यहाँ देख सकते हैं। अपने तीसरे लेख में भी उन्होंने बहुत ज़रूरी सवालों...
राजेन्द्र भट्ट* प्राथमिक शिक्षा पर राजेंद्र भट्ट के पिछले लेख ने कई महत्वपूर्ण प्रश्नों को उठाया और जवाब तलाशने की कोशिश भी की। इस विषय पर उनका चिंतन-मनन जारी है। प्रस्तुत लेख में उन्होंने...

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