डॉ मधु कपूर* दार्शनिक सिद्धांतों को हमारी वेबपत्रिका के लिए सहज-सुगम शैली में प्रस्तुत कर रहीं डॉ मधु कपूर का यह बारहवां लेख है। इससे पूर्व के उनके सभी लेखों के लिंक हम इस...
Rajesh K. Jha* We are publishing a letter written by a father to his son on his 10thbirthday. You may well ask why is it being published? Well, it’s only 5-minuteread, please have a...
जैनबहादुर* लोहिया के सपनों का भारत, भारतीय समाजवाद की रुपरेखा: लेखक प्रोफेसर अशोक पंकज लोकभारती प्रकाशन, प्रयागराज द्वारा प्रकाशित मूल्य 225 रुपए, पृष्ठ 199   प्रखर समाजवादी...
राजकेश्वर सिंह* लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र की नई सरकार में नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बन चुके हैं और उनकी सरकार ने कामकाज भी संभाल लिया है, लेकिन भाजपा की हार, राजग की...
डॉ मधु कपूर* "कोई सवाल उठा सकता है ‘बन्ध’ और ‘मोक्ष’ यह तो एक तरह का विरोधी समन्वय है. मोक्ष किससे? फिर बन्धन कैसा? यही तो हमारी बिडम्बना है, मन छुटकारा भी पाना...
ओंकार केडिया* ओंकार केडिया के पैने आलेखों की बानगी आपने उनके पिछले लेख अमलतास, गुलमोहर और गुलज़ार  में देख ही चुके हैं जिसमें सुकोमल अनुभूतियों के साथ-साथ व्यंग्य का भी सहज मिश्रण था। हाल...
पिछले कुछ समय से दार्शनिक सिद्धांतों को हमारी वेबपत्रिका के लिए सहज-सुगम शैली में प्रस्तुत कर रहीं डॉ मधु कपूर का यह दसवां लेख है। इससे पूर्व के उनके सभी लेखों के लिंक हम इस लेख के...
ओंकार केडिया* ओंकार केडिया की कविताओं से आप पहले ही परिचित हैं। इस वेब पत्रिका में प्रकाशित उनकी अनेक कविताओं में से कुछ आप यहाँ, यहाँ,यहाँ और यहाँ पढ़ सकते हैं। कविताओं के अलावा...
डॉ मधु कपूर* पिछले कुछ समय से दार्शनिक सिद्धांतों को हमारी वेबपत्रिका के लिए सहज-सुगम शैली में प्रस्तुत कर रहीं डॉ मधु कपूर का यह नौवां लेख है। इससे पूर्व के उनके सभी लेखों...
सुधीरेंद्र शर्मा* “जो जाने-माने कवि और गीतकार आनंद बक्शी को नहीं जानता वो हिंदी सिनेजगत से वाकिफ नहीं है”, यह कहना है प्रसिद्ध कवि एवं गीतकार गुलज़ार का और उनका यह कथन हाल ही...

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